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Category: Poetry

Poetry

घरौंदा

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-किरण अरविन्द खोडके चूं-चूं करतें शोर मचाते।खेल रहे थे, घरौंदे में।कभी वो उपर, कभी वो नीचे।उड़ने को तैयार…

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हरी भरी ये धरा हमारी

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-शकुंतला कालिया हरी भरी ये धरा हमारी,,सुंदर और प्राणोंसे भी प्यारी।नदियां गातीमीठा गान,,देतीं जीवन को, पहचान।बूंद बूंद इसकी,,…

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आओ पर्यावरण बचाएं…

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-डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव पौधारोपण करते जाएं,आओ पर्यावरण बचाएं… वसुधा पर हरियाली लाएं,बदलें हम तस्वीर धरा की,पशुओं को जीवन…

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मैं हूं एक बीज

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-निरुपमा खरे उड़ने वाला, पंखदाररुई से कोमल, नन्हें रेशेदार पंख लिएउड़ता फिरता हूं, हवा के झोंके के साथकभी…

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पर्यावरण सुरक्षा

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-शेफालिका श्रीवास्तव आओ पर्यावरण बचायें,वृक्षा रोप खुशहाली लायें। फैल रहा है खूब प्रदूषण,काट रहा मानव जंगल वन।हो रहा…

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कलयुग अभी प्रारंभ हुआ है

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– कल्पना विजयवर्गीय एक घना पेड़, पूरे पंख फैलाए, स्वच्छंद लहराए,पेड़ की निश्छल छांव में, गरीब चार ठेले…

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धरा का श्रृंगार

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– बिन्दु त्रिपाठी मैं धरा का हार हूँ,प्रकृति का श्रृंगार हूँ।मत करो नफ़रत मुझसे,मैं तुम्हारा प्यार हूँ।प्यार से…

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मानव रोको प्रकृति अति दोहन

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– बलजीत सलूजा हरियाली सिमट रही धरा कीप्राणवायु कम, ताप अपार ,वृक्ष कटे ताल भी सूखेऋतुचक्र असंतुलित आज,मानव…

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प्यारी प्यारी प्रकृति

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– मनोरमा श्रीवास्तव हिमाच्छादित श्वेत पर्वतों की सर्द हवाएं,कोहरे की ओढ़े चादरउनींदी सी लगी प्रकृति, झीलों झरनों नदियों…