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उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा स्ट्रॉबेरी (Fragaria × ananassa) की व्यावसायिक खेतीः

Mr. Nitish Kumar¹, Mr. Nikhil Tiwari Shreedutt², Dr. Kundan Kishore³

पृष्ठ 1 : परिचय (INTRODUCTION)

स्ट्रॉबेरी एक महत्वपूर्ण नकदी फल फसल है, जिसका वैज्ञानिक नाम Fragaria × ananassa है। यह गुलाब कुल (Rosaceae Family) से संबंधित पौधा है। स्ट्रॉबेरी का फल स्वादिष्ट, पौष्टिक तथा विटामिन-C, एंटीऑक्सीडेंट एवं खनिज तत्वों से भरपूर होता है। भारत में इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है क्योंकि बाजार में इसकी मांग और मूल्य दोनों अधिक हैं।

आज के समय में वैज्ञानिक खेती तकनीकों द्वारा स्ट्रॉबेरी उत्पादन को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तथा उन्नत किस्मों के उपयोग से किसान अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।

स्ट्रॉबेरी का पोषण महत्वः

पोषक तत्व — मात्रा प्रति 100 ग्राम

पोषक तत्वमात्रा
विटामिन-C58 mg
कैल्शियम16 mg
आयरन0.4 mg
ऊर्जा33 कैलोरी
फाइबर2 ग्राम

भारत में प्रमुख उत्पादक राज्यः – महाराष्ट्र – हिमाचल प्रदेश – उत्तराखंड – जम्मू-कश्मीर – उत्तर प्रदेश

पृष्ठ 2 : जलवायु एवं मिट्टी (Climate and Soil Requirements)

उपयुक्त जलवायुः स्ट्रॉबेरी ठंडी एवं समशीतोष्ण जलवायु की फसल है।

कारकउपयुक्त सीमा
तापमान15°C–30°C
वर्षा600–800 mm
आर्द्रता70–80%
धूप6–8 घंटे

मिट्टी की आवश्यकताः – बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है। – जल निकास अच्छा होना चाहिए। – मिट्टी कार्बनिक पदार्थों से भरपूर हो।

खेत का चयनः – समतल भूमि – सिंचाई सुविधा – बाजार के निकट क्षेत्र – रोग मुक्त भूमि

पृष्ठ 3 : भूमि तैयारी एवं रोपण तकनीकः

खेत की तैयारी: 1. खेत की 2-3 बार जुताई करें। 2. खरपतवार हटाएं। 3. गोबर की खाद मिलाएं। 4. उभरी हुई क्यारियां बनाएं।

पौध रोपणः

विवरणमानक
रोपण समयसितंबर–नवंबर
पौध दूरी30 cm
कतार दूरी45 cm
पौधे/हेक्टेयर40,000

मल्चिंग तकनीकः – काली पॉलीथीन मल्च का उपयोग। – खरपतवार नियंत्रण। – नमी संरक्षण। – फलों की गुणवत्ता बेहतर।

पृष्ठ 4 : उन्नत किस्में (Improved Varieties)

प्रमुख किस्में:

किस्मविशेषता
Chandlerअधिक उत्पादन
Sweet Charlieमीठा स्वाद
Camarosaबड़े फल
Winter Dawnजल्दी तैयार

पौध चयन – रोग मुक्त पौधे – प्रमाणित नर्सरी से खरीदें – स्वस्थ जड़ प्रणाली

ऊतक संवर्धन तकनीकः इस तकनीक द्वारा रोगमुक्त पौधे तैयार किए जाते हैं।

पृष्ठ 5 : सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management)

ड्रिप सिंचाई प्रणाली — ड्रिप सिंचाई द्वारा पानी सीधे जड़ों तक पहुँचता है।

लाभ – 40% पानी की बचत – अधिक उत्पादन – रोग कम – उर्वरक उपयोग दक्षता

सिंचाई अनुसूची

मौसमसिंचाई अंतराल
सर्दी7–10 दिन
गर्मी4–5 दिन

पृष्ठ 6 : पोषक तत्व एवं उर्वरक प्रबंधन

खाद एवं उर्वरक मात्रा (प्रति हेक्टेयर)

उर्वरकमात्रा/हेक्टेयर
गोबर खाद25 टन
नाइट्रोजन100 kg
फास्फोरस80 kg
पोटाश60 kg

उर्वरक गणना सूत्रः NPK-100:80:60

जैविक खेती – वर्मी कम्पोस्ट – जीवामृत – नीम खली – जैव उर्वरक

पृष्ठ 7 : रोग एवं कीट प्रबंधन

प्रमुख रोगः

रोगलक्षण
पाउडरी मिल्ड्यूसफेद चूर्ण
फलसड़न
फलखराब
पत्तीधब्बा
भूरेधब्बे

कीट नियंत्रण – एफिड – थ्रिप्स – लाल मकड़ी

एकीकृत रोग प्रबंधन (IPM) — Integrated Pest Management – जैविक नियंत्रण – फेरोमोन ट्रैप – रोगरोधी किस्में

पृष्ठ 8 : उत्पादन एवं कटाई

फल तुड़ाई – फल लाल होने पर तोड़ें। – सुबह के समय तुड़ाई करें। – प्लास्टिक ट्रे में रखें।

उत्पादन क्षमता [low confidence — the printed line reads “y=2x+4y = 2x + 4y=2x+4”; this appears to be a typesetting/printing anomaly in the original source rather than an OCR misread on my part — reproduced as printed]

तकनीकउत्पादन (टन/हेक्टेयर)
पारंपरिक खेती6–8
वैज्ञानिक खेती10–15

[A bar chart titled “उत्पादन वृद्धि ग्राफ / उत्पादन तुलना” (production increase graph / comparison) appears beside this table, comparing पारंपरिक (traditional) vs वैज्ञानिक (scientific) methods on a 0–15 scale — consistent with the 6–8 vs 10–15 ton/hectare figures above. See extracted image for the chart itself.]

पृष्ठ 9 : विपणन एवं आर्थिक लाभ

बाजार मांग — स्ट्रॉबेरी की मांग होटल, आइसक्रीम, जूस एवं बेकरी उद्योग में अधिक है।

लागत एवं लाभ

विवरणराशि (₹/हेक्टेयर)
कुल लागत3–4 लाख
कुल आय7–10 लाख
शुद्ध लाभ4–6 लाख

मूल्य संवर्धनः – जैम – जेली – जूस – आइसक्रीम

स्ट्रॉबेरी के फलो की तुड़ाईः

स्ट्रॉबेरी के पौधों पर लगे फल का रंग जब 70 प्रतिशत तक आकर्षक दिखाई देने लगे उन दौरान फलो की तुड़ाई कर ली जाती है। इसके फलो की तुड़ाई अलग-अलग दिनों में की जाती है। फलो की तुड़ाई के समय उन्हें कुछ दूरी पर डंठल के साथ तोड़ना होता है ताकि फलों में हाथ न लगे। इसके बाद फलो की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटो में करना काफी अच्छा होता है। पैकिंग के पश्चात् उन्हें हवादार जगह पर रखना होता है, जहा का तापमान 5 डिग्री के आसपास होना चाहिए।

पृष्ठ 10 : निष्कर्ष एवं भविष्य

निष्कर्षः वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हो रही है। आधुनिक सिंचाई, मल्चिंग, उन्नत किस्मों तथा रोग प्रबंधन तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।

भविष्य की संभावनाएँः Precision Farming – स्मार्ट कृषि – सेंसर आधारित सिंचाई – जैविक खेती – निर्यात संभावनाएँ

संदर्भ (References): 1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) 2. राष्ट्रीय बागवानी मिशन 3. कृषि विज्ञान केंद्र प्रकाशन 4. आधुनिक फल विज्ञान पुस्तकें

Authors
1. P.hD Research Scholar, Department of Agricultural Extension & Communication,
Naini Agricultural Institute, SHUATS, Prayagraj U.P.
2. CO-Author Name — Mr. Nikhil Tiwari Shreedutt, P.hD Research Scholar, Department of
Agricultural Extension & Communication, Naini Agricultural Institute, SHUATS, Prayagraj U.P.
3. CO-author Name — Dr. Kundan Kishore, Principal Scientist, & Head of the Division of Crop Production, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture (ICAR-CISH), Lucknow.(Page footers: “50/51 — वर्ष: 10 अंक-38 भोपाल, अप्रैल से जून – 2026 — ME & MY EARTH — वन एवं जल बचाएं, वन्यप्राणी बचाएं एवं पृथ्वी बचाएं / Save Forest, Wildlife & Save The Earth”)


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