इन्सान और पेड़
— अनुपम सक्सेना इन्सान पेड़ से बन तो गया आदमी,पर जड़ से कटते ही वो आदमी,अपने पूर्वज पेड़…
— अनुपम सक्सेना इन्सान पेड़ से बन तो गया आदमी,पर जड़ से कटते ही वो आदमी,अपने पूर्वज पेड़…
-सुनीता यादव अमराई से खुल गये, मौसम के सब भेद।खाली खाली डाल है, कोयल को है खेद।। सदासुहागन…
-मृदुल त्यागी जब तक वन की सांस बचेगीतब तक जीवन की आस बचेगी। नदियों का कल कल संगीतयह…
-वसुधा श्रीवास्तव मां वसुंधरा कर रही पुकार मत करो मुझ पर अब अत्याचार,पर्यावरण एक दिन मनाकर फिर क्यों…
-सीमा जैन छाया थी जब तक मेरीघर पर तुम्हारे, कहते थे तुमनहीं जरूरत मुझे ए सी कीछत पर…
-डॉ रेणु श्रीवास्तव आओ मिलकर आज शपथ लेंपर्यावरण बचाने कीजागरूकता पैदा कर केजन जन को जगाने की। पेड़…
-वंदना अतुल जोशी मेरे घर के आँगन में लगा था एक आम का पेड़,हरा-भरा ऊँचा, सुंदर प्यारा सा।आत्म…
-डॉ नीलिमा रंजन ये ग्रीष्म है कि पावस,क्यों है बेमौसम रिमझिमऔर रिमझिम में शिशिर सा कंपन-उफ़ ये अचानक…
-मधूलिका श्रीवास्तव हज़ारों शब्द जोड़ करकविता न लिखकरमिट्टी में बोया होताअगर मैंने एक बीजएक पेड़ उगा होताजिस पर…
-कमल चंद्रा धरती, अवनि, धरणी, मैं कहलाऊं,सदियों का इतिहास लिए मैं जीती जाऊं।हाँ! मैं धरती हूँ.. रत्नों को…