-मधूलिका श्रीवास्तव
हज़ारों शब्द जोड़ कर
कविता न लिखकर
मिट्टी में बोया होता
अगर मैंने एक बीज
एक पेड़ उगा होता
जिस पर होतीं
करोड़ों पत्तियाँ
होते अनगिनत
फल और फूल
लाखों पंछी
करते बसेरा
और चहकते
आतीं ढेरों तितलियाँ
भँवरे करते गुंजन
विभिन्न रंगों से सजता
खिलखिलाता तरु
करता स्वागत
क्लांत पथिक का
तब शायद मेरा मन
भी चमक उठता
नव रत्नों सा

साहित्यकार

