Nature Poetry
सतपुड़ा के पर्णपाती वन
ओ, सतपुड़ा के पर्णपाती वन, वृक्ष तुम्हारे क्यों है उन्मन। परस्पर करते प्रतिस्पर्धा, चाह उनकी छू ले गगन…
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ओ, सतपुड़ा के पर्णपाती वन, वृक्ष तुम्हारे क्यों है उन्मन। परस्पर करते प्रतिस्पर्धा, चाह उनकी छू ले गगन…