धरती माँ
– वंदना गुप्ता किसी भी स्त्री का आवरणउसकी मर्यादा अखंड रखता हैक्यूं लाज नहीं आती…धरती माँ का आवरण…
– वंदना गुप्ता किसी भी स्त्री का आवरणउसकी मर्यादा अखंड रखता हैक्यूं लाज नहीं आती…धरती माँ का आवरण…
– डॉ. सीमा अग्रवाल दूर मुरझाये पेड़बारिश की आस लगाये,यूँ गुमसुम सेहरे भरे पेड़ों को देखजो नदी के…
– वंदना त्रिपाठी पर्यावरण को बचाना है जरूरी,नहीं तो हम भी नष्ट हो जायेंगे,सूना सूना जग होगा निरजन…
–नीता श्रीवास्तव श्रद्धा पृथ्वी बनी जीवन आधारनिखरा इसका सौंदर्य अपार।हरियाली की चूनर ओढ़े,देती पृथ्वी हमको उपहार॥ नदियाँ गातीं…
– सुधा दुबे “एक पेड़ माँ के नाम”सेल्फी ली और चल दिए।माँ घर में बैठीं रहींपेड़ धूप में…
– चित्रा चतुर्वेदी आओ मिलजुल वृक्ष लगायेंकदम कदम हरियाली पायें वृक्षों से ऑक्सिजन मिलतीजिससे हम सब सांस ले…
– खंजन सिन्हा हरी भरी वसुन्धरा हमको प्यारी है ।हम प्राणियों का सदा बोझ उठाती है । कभी…
– डॉ साधना गंगराड़े मशीनों से तूने मुझे रौंदाएक बीज सेदिया तुझे अनगिनतज्यादा की चाहत मेंरसायन मुझ पर…
– डॉ. कुंकुम गुप्ता वृक्षों में होता स्पंदनजल न मिले तो करते क्रंदनमुरझा जाते हैं असमय हीनिसर्ग का…
– अनीता सक्सेना हम सूरज से कभी नहीं कहते क्यों तपते हो इतना ?हम धरती से कभी नहीं…