– सुधा दुबे
“एक पेड़ माँ के नाम”
सेल्फी ली और चल दिए।
माँ घर में बैठीं रहीं
पेड़ धूप में जल दिए।
“पृथ्वी हमारी माँ है”
भाषण गूँजा जोर से।
माँ की साँसें घुटी
आया अटैक जोर से।
“ग्रीन सिटी” का बोर्ड लगा,
पेड़ सब उखड़ गए।
रोड पर पेड़ थे
झोपड़ी में लटक गए।
स्मार्ट सिटी के नाम से,
शहर के पेड़ कट गए।
अटल पथ अटल रहा,
बाकी सब टल गए।
जल ही जीवन* का लगा था बोर्ड,
पाइपलाइन कोई गया फोड़,
*पानी मुस्कुरा के बोला*
घर में जीवन हूँ, मुझसे रिश्ता जोड़
नहीं तो कल, तुझे जाऊँगा छोड़।
सेव अर्थ सफेद टी-शर्ट पहन
रैली निकाली फोटो खिंचाई।
एनजीओ से फंड लिया रिपोर्ट पर रंगीन बनवाई।
धरती पूछे बड़े प्यार से,
“कब सुधरोगे मेरे लाल”?
हम बोले “सेल्फी ले लो यार,
फिर कर लेंगे इनका ख्याल।
बच्चे पूछेंगे आने वाले
“दादा पेड़ कहाँ उगते थे?
हम फोटो एल्बम दिखलाएंगे,
“बेटा कभी यहाँ जंगल उगते थे।”

वरिष्ठ साहित्यकार

