– खंजन सिन्हा
हरी भरी वसुन्धरा हमको प्यारी है ।
हम प्राणियों का सदा बोझ उठाती है ।
कभी न वह हमसे कुछ माँगती
बिन मांगे पूरी करती आशाएं हमारी ।
पर्वत नदियों में छुपा हुआ है खजाना।
यही लौटाती हमको सौगात हमारा।
सदा धरती माता की रक्षा करना
यही कर्तव्य हमारा है ।
प्लास्टिक का उपयोग कर कभी न उसे सताना ।
न ही कभी वृक्षों पर प्रहार करना न उसके आँसू गिराना
पर्यावरण सुरक्षित रहे , रहे हरी भरी वसुन्धरा
यही संदेश जन जन तक पहुंचाना।

वरिष्ठ साहित्यकार

