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हरियाली का संदेश

-मृदुल त्यागी

जब तक वन की सांस बचेगी
तब तक जीवन की आस बचेगी।

नदियों का कल कल संगीत
यह है जीवन का अनुपम गीत।
पत्तों की सर सर धुन में

धरती भी कुछ कहती है
वन उपवन सब सुख रहे हैं
वह चुप रहकर भी सब सहती है।

नदियां मैली झीलें प्यासी है
हवा में भी दिखती उदासी है।

धुएं ने जाल बिछाया है
नीला अंबर भी धुंधलाया है।

पेड़ों का सम्मान करो तुम
जीवन का गुणगान करो तुम।

आओ मिलकर शपथ उठाएं
एक-एक पौधा हम सब लगाएं

आने वाले कल को बचाएं
हरियाली का दीप जलाएं।

साहित्यकार


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