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मां वसुंधरा कर रही पुकार

-वसुधा श्रीवास्तव

मां वसुंधरा कर रही पुकार मत करो मुझ पर अब अत्याचार,
पर्यावरण एक दिन मनाकर फिर क्यों भूल जाते हो
अपने स्वार्थ के कारण वृक्षों को प्रतिदिन कटवाते हो,

जिस धरती में जन्म लिया उसी को हमेशा सताते हो देती हूं
मैं अनमोल भंडार इस बात को क्यों भूल जाते हो,

बड़े-बड़े पुल, माल और बहुमंजिला बनाकर वृक्षों को कटवाते हो,
चाहे कोई भी अवसर हो मेरे पत्ते फूलों से ही घर सजाते हो,

फलदार वृक्षों की तरह जीवन में विनम्रता लाओ,
आप रहो या ना रहो दूसरों को हमेशा सुख पहुंचाओ,

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर,
इस बात को जीवन में मत अपनाओ फलदार
वृक्ष की तरह हमेशा शीश झुकाओ,

नदियों की अविरल धारा की भी करनी होगी सुरक्षा,
जल ही जीवन है इस बात की देनी होगी भावी पीढ़ी को शिक्षा,

कोरोना में सीख गए हो प्राण वायु का कितना है मोल,
पर्यावरण को अनवरत बचाओ, प्लास्टिक की वस्तुओं का बहिष्कार करके दिखाओ,

पर्यावरण अनवरत बचाओ अपने बच्चों को भी सिखलाओ,
विशेष अवसरों पर वृक्ष लगाकर उस अवसर को विशिष्ट बनाओ,

पेस्टिसाइड का मत करो अधिक उपयोग लहसुन
प्याज के छिलकों को पीसकर पौधों को कीड़ों से बचाओ,

विदेश में पढ़ने जाते हो, आधुनिकता ही अपनाते हो,
प्रकृति का सौंदर्य देखकर आते हो, फिर भी नहीं सीख पाते हो,

वहां से कुछ सीख कर आओ, अपने देश के लिए कुछ करके दिखलाओ,
सकारात्मक विचारों को मन में लाओ, मां वसुंधरा की गोद सजाओ,

उसकी आंखों में आंसू ना आए, ऐसा प्रयास करते जाओ,
आने वाली पीढ़ी के लिए प्राण वायु का भंडार भर के दिखाओ।

साहित्यकार


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