-सुमीत नायर
धरती पर बिछी हो हरित चादर,
उड़ते आँचल सा नीला अम्बर।
पौधों से भरा हुआ हो हर आँगन,
चिड़ियों का कलरव पुलकित मन।
खुशबू सी फैली पुष्प लताएं,
नदियाँ कल-कल बहती जाएं।
पेड़ों की कतारें प्रकृति सजाएं,
धूप ताप से हमें यह बचाएं।
आओ सब कसम यह खाएं,
सृष्टि को प्रदूषण से हम बचाएं।
कचरा प्लास्टिक ना फैलाएं,
कपड़े का थैला प्रयोग में लाएं।
नदियाँ दूषित न हो पाएं,
पेड़ों को कटने से बचाएं।
पर्यावरण संरक्षण लक्ष्य बनाएं
धरती को मिलकर स्वर्ग बनाएं।।

साहित्यकार

