Read this page in your preferred languageArticles may be originally written in English or Hindi. Use translation to read them in the other language.
1 min read

मैं हूं एक बीज

-निरुपमा खरे

उड़ने वाला, पंखदार
रुई से कोमल, नन्हें रेशेदार पंख लिए
उड़ता फिरता हूं, हवा के झोंके के साथ
कभी ऊपर, कभी नीचे
गोते लगाता, मनमर्जियां करता
कभी जा चिपकूं किसी रमणी के गालों पर
कभी करुं अठखेलियां उसकी स्याह जुल्फों संग
कभी किसी बांकुरे के सीने से लग जाऊं
कभी किसी आंगन में खाट पर सोते
मां के लाल को हौले से छू आऊं
मां की थकी हुई, मुंदी हुई
पलकों को हल्के से चूम आऊं
मेहनतकश चरणों को सहला आऊं
किसी के आंसू पोंछू
किसी शिशु संग किलकारी मारुं,
बस, उड़ता ही जाऊं
दूर-दूर, बहुत दूर
और जब थक कर गिरूं धरा पर
बियाबान और उजाड़ जगह पर
मिट्टी में दब जाऊं
जब आएगी पहली बारिश
रिमझिम फुहारों से तर जाऊं
फिर एक नया जीवन उपजाऊं
हां मैं फिर अंकुरित हो जाऊं

साहित्यकार


Share: Facebook | X | WhatsApp

Continue Reading

Poetry

घरौंदा

1 min read

-किरण अरविन्द खोडके चूं-चूं करतें शोर मचाते।खेल रहे थे, घरौंदे में।कभी वो उपर, कभी वो नीचे।उड़ने को तैयार…

Poetry

हरी भरी ये धरा हमारी

1 min read

-शकुंतला कालिया हरी भरी ये धरा हमारी,,सुंदर और प्राणोंसे भी प्यारी।नदियां गातीमीठा गान,,देतीं जीवन को, पहचान।बूंद बूंद इसकी,,…

Poetry

आओ पर्यावरण बचाएं…

1 min read

-डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव पौधारोपण करते जाएं,आओ पर्यावरण बचाएं… वसुधा पर हरियाली लाएं,बदलें हम तस्वीर धरा की,पशुओं को जीवन…