Read this page in your preferred languageArticles may be originally written in English or Hindi. Use translation to read them in the other language.
1 min read

दूर मुरझाये पेड़

– डॉ. सीमा अग्रवाल

दूर मुरझाये पेड़
बारिश की आस लगाये,
यूँ गुमसुम से
हरे भरे पेड़ों को देख
जो नदी के कुछ पास
जिनकी जड़ें फैली है।
जिनकी टहनियों में
चिड़ियों के घोंसला हैं।
सुबह शाम उनकी
चहचहाहट से
गूंज उठता आसमान
वो मुरझाए पेड़
जिसे शायद कोई
मंत्री लगा कर गए थे,
फिर उन्होंने इन पेड़ों
की सुध नहीं ली,
वह सब पेड़ अपने
अस्तित्व की रक्षा हेतु
आसमान तकते हैं,
बारिश को तरसते हैं,
कहीं उससे पहले
कोई सड़क चौड़ी करने वाले
या मकान बनाने
के लिए उन्हें काट
ना दिया जाए।
उनमें से कुछ फूल,
कुछ फल, कुछ दवाई में
काम आने वाले
वृक्षों की घोषणा
पेपर पर बड़ी-बड़ी
बातें कहकर की गई थी,
आज वह अपने
अस्तित्व की पुकार
कर रहे हैं।
उनका भी मन है
उनकी छाया तले
बच्चे, बड़े,बैठ
फल तोड़कर खाएं,
फूल से वातावरण
सुगंधित हो।
कितनी जड़ी- बूटियों
वाले पेड़ हैं,
जो शायद आजकल के नौजवान
युवक, युवतियाँ जानते भी ना हो।
ना ही इससे परिचित
होना चाहते।
पर वह पेड़ अपने
अस्तित्व और लाभ की
जानकारी देना चाहते हैं।
क्योंकि वे जानते हैं
उनके बिना पृथ्वी
संकट में है,
वे पेड़ एहसास कर रहे
पर्यावरण पर लोग चिंता
तो जता रहे पर,
उसकी रक्षा हेतु,
कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।

वरिष्ठ साहित्यकार


Share: Facebook | X | WhatsApp

Continue Reading

Poetry

इन्सान और पेड़

1 min read

— अनुपम सक्सेना इन्सान पेड़ से बन तो गया आदमी,पर जड़ से कटते ही वो आदमी,अपने पूर्वज पेड़…

Water

जल संरक्षण

1 min read

— पुनीत चतुर्वेदी जल प्रदूषण के मामले में विश्व में भारत 120वें नंबर पर है, 123 देशों में।…