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मध्यप्रदेश के जंगल

अब्दुल बारी

अगर जोश-ए-बहारां देखना है,
कुछ कुदरत का करिश्मा देखना है,
गर देखना है, तुमको छटा निराली,
तो प्यारों मध्यप्रदेश के जंगल देखना है।

तान कर सर को जहाँ पर्वत खड़े,
और शजर क़द-ओ-क्रामत में बड़े,
बहते झरने, वादियाँ गर देखना है,
तो प्यारों मध्यप्रदेश के जंगल देखना है।

यहाँ ताज़ी हवा तुमको मिलेगी.
सुकून-ओ-राहत यहाँ तुमको मिलेगी,
दुनिया से बेपरवाह आलम देखना है. –
तो प्यारों मध्यप्रदेश के जंगल देखना है।

कहीं मोर नाचते हैं, कही भंवरे गुनगुनाएँ,
कहीं शेर की दहाड़ कहीं चिड़ियाँ चहचहाएँ,
यौवन प्रकृति का अगर देखना है,
तो प्यारों मध्यप्रदेश के जंगल देखना है।

यहाँ वन विहार राष्ट्रीय उद्यान है,
जो भोपाल शहर की जान है,
देश का वैभव अगर देखना है,
तो प्यारों मध्यप्रदेश के जंगल देखना है।


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