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सर्वोच्च न्याालय (सुप्रीम कोर्ट): पेड़ों को काटना मानव हत्या से भी बदतर है

यह टिप्पणी 25 मार्च 2025 को सुनवाई के दौरान की गई थी, और यह फैसला पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पेड़ों की अवैध कटाई के बारे में वास्तव में एक चौंकाने वाली घोषणा की है, जिसमें कहा गया है कि बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना “मानव हत्या से भी बदतर है।” यह टिप्पणी 25 मार्च 2025 को सुनवाई के दौरान की गई थी।

यह मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में ‘ताज ट्रेपेज़ियम जोन’ (Taj Trapezium Zone) से संबंधित है, जहाँ शिवशंकर अग्रवाल नामक एक व्यक्ति द्वारा डालमिया फार्म पर 454 पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे। इस घटना को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Central Empowered Committee – CEC) की रिपोर्ट को स्वीकार किया, जिसमें प्रति पेड़ 1 लाख रुपये जुर्माने की सिफारिश की गई थी। कुल मिलाकर, 4.54 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया । न्यायालय ने इस तरह की गंभीर कार्रवाइयों से होने वाले गंभीर और अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय नुकसान पर जोर दिया और कहा कि, इन 454 पेड़ों से बने हरित क्षेत्र को पुनर्जनन करने में कम से कम 100 वर्ष लगेंगे। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुयान की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि पर्यावरणीय नुकसान से जुड़े मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने यह भी अनिवार्य किया कि व्यक्ति अपने कार्यों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वृक्षारोपण गतिविधियों में शामिल हो। “पर्यावरण के मामले में कोई दया नहीं होनी चाहिए। बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना किसी इंसान की हत्या से भी जघन्य है।” पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भारत में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई के खिलाफ सख्त दंड के लिए एक मिसाल कायम करता है। इसके साथ ही, कोर्ट ने अग्रवाल की ओर से जुर्माना कम करने की अपील को ठुकरा दिया और उन्हें निकटवर्ती क्षेत्र में पौधारोपण करने की अनुमति दी गई। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के पर्यावरण संरक्षण के प्रति सख्त रुख को दर्शाता है और इसे कई समाचार स्रोतों ने रिपोर्ट किया है।

संदर्भ और स्रोतः

[1] सुप्रीम कोर्ट: बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई अधिक हानिकारक है… https://lawtrend.in/supreme-court-felling-trees-on-a-large-scale-more-detrimental-than-homicide/

[2] सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों की कटाई को हत्या से भी बदतर बतायाः व्यक्ति पर ₹1 लाख प्रति … https://voiceofplant.com/sc-cutting-trees-is-worse-than-murder

[3] भारत की असली पुष्पा? सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रूप से पेड़ काटने के लिए एक व्यक्ति पर 4.54 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया… https://economictimes.com/news/india/indias-real-pushpa-sc-slaps-man-with-rs-4-54-crore-fine-for-illegal-cutting-over-400-trees/articleshow/119514634.cms

[4] सुप्रीम कोर्ट ने प्रति पेड़ ₹1 लाख का जुर्माना लगाया । सुप्रीम कोर्ट का फैसला … https://www.youtube.com/watch?v=6q0yZe84YPK

[5] बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना किसी इंसान की हत्या से भी बदतर है… https://timesofindia.indiatimes.com/india/cutting-large-number-of-trees-worse-than-killing-a-human-being-says-supreme-court/articleshow/119498838.cms

[6] सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेड़ों को काटना हत्या से भी बदतर है। जानिए भारत का … https://www.indiatoday.in/information/story/cutting-trees-worse-than-murder-says-supreme-court-know-indias-tree-protection-laws-2699352-2025-03-26

[7] सुप्रीम कोर्ट ने बिना अनुमति के पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले 2019 के आदेश को वापस लिया… https://www.livelaw.in/top-stories/supreme-court-recalls-2019-order-allowing-tree-felling-without-courts-permission-in-taj-trapezium-zone-287466

[8] भारत का असली पुष्पा? यह इंसानों को मारने से भी बदतर है – द हंस इंडिया… https://www.thehansindia.com/news/national/indias-real-pushpa-its-worse-than-killing-humans-957540

[9] सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रूप से पेड़ों की कटाई के लिए ₹4.54 करोड़ का जुर्माना लगाया … https://vrindavantoday.in/supreme-court-imposes-%E2%82%B94-54-crore-fine-for-illegal-tree-felling-in-mathuras-dalmia-bagh/


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